बिल्डिंग रेगुलराइजेशन : आधा समय बीता, 33 दिन में मात्र 43 आवेदन आए |

रांची सहित राज्य के सभी शहरों में बिना नक्शा के बने करीब सात लाख भवनों को नियमित करने के लिए सरकार की ओर से लाई गई बिल्डिंग रेगुलराइजेशन नियमावली-2026 को लागू हुए एक माह से अधिक हो गया है। इसके तहत बिना नक्शा के घर बना चुके लोगों को दो माह के अंदर आवेदन करना है। लेकिन 33 दिन गुजरने के बाद शनिवार देर शाम तक मात्र 43 आवेदन जमा हुए हैं।

नगर निगम में 30 और आरआरडीए में मात्र 13 आवेदन जमा हुए हैं। जबकि सिर्फ रांची में ही करीब 1.75 लाख भवन अवैध बने हुए हैं।

लोगों के आगे नहीं आने की वजह जानने के लिए दैनिक भास्कर ने पांच लाइसेंसी टेक्निकल पर्सन से बात की। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग प्लान मैनेजमेंट सिस्टम (BPAMS) से नक्शा का आवेदन जमा हो रहा है। इसमें मास्टर प्लान के अनुसार सड़क की चौड़ाई मांगी जा रही है। कम से कम 25 फीट चौड़ी सड़क होने पर ही आवेदन जमा हो रहा है।

फ्रंट, साइड और रियर सेटबैक पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस वजह से आवेदन आगे नहीं आ रहे हैं।

दरअसल, मास्टर प्लान के अनुसार सड़क की चौड़ाई कम से कम 25 फीट होनी चाहिए। लेकिन सैकड़ों मोहल्ले ऐसे हैं, जहां सड़क की चौड़ाई 10 से 15 फीट ही है। 15 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित भवन को नियमित कराने के लिए भवन मालिक को कम से कम पांच फीट जगह छोड़नी होगी या भवन का हिस्सा तोड़ना होगा। इसलिए भवनों को नियमित कराने के लिए आवेदक आगे नहीं आ रहे हैं।

भास्कर एक्सपर्ट

सुजीत भगत, आर्किटेक्ट

प्लॉट क्षेत्रफल की सीमा

भवन नियमितीकरण में प्लॉट का क्षेत्रफल 3228 वर्गफीट (7.41 डिसमिल) तय किया गया है। उक्त प्लॉट पर बने जी+2 बिल्डिंग को ही नियमित किया जाएगा।

प्लॉट का क्षेत्रफल निर्धारित किए जाने से आदिवासी परिवारों को अपने भवनों को नियमित कराना चुनौती बन गई है। क्योंकि अधिकतर परिवारों के पास 10 डिसमिल या उससे बड़े प्लॉट हैं, लेकिन घर एक या दो मंजिला ही बना है। इसलिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।


सेटबैक-पार्किंग नियम

जिस तरह खाली प्लॉट पर नया भवन बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है, पहले से बने भवनों का भी आवेदन उसी आधार पर किया जाना है।

ऐसे में फ्रंट, रियर और साइड सेटबैक तथा पार्किंग का विकल्प भरने के लिए कहा जा रहा है। जिन भवनों के चारों ओर जगह नहीं छोड़ी गई है, उनका नक्शा जमा होना मुश्किल है। इस वजह से भी आवेदक पीछे हट रहे हैं।


25 फीट चौड़ी सड़क की शर्त

नियमावली के तहत मास्टर प्लान में निर्धारित सड़क की चौड़ाई के आधार पर भवनों का नक्शा स्वीकृत होगा।

इसलिए जब BPAMS सॉफ्टवेयर में आवेदन का विवरण डाला जा रहा है तो उसमें सड़क की चौड़ाई का विकल्प खुल रहा है। कम से कम 25 फीट चौड़ी सड़क होने पर ही आवेदन जमा होगा।

ऐसे में जिन सड़कों की चौड़ाई 10 से 20 फीट ही है, वहां बने भवनों के लिए आवेदन देना मुश्किल हो गया है। ऐसे सैकड़ों मोहल्लों के लोग अपने भवन को नियमित कराने का आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।


मालगुजारी रसीद का संकट

रांची में हजारों भवन मालिकों की जमीन की मालगुजारी रसीद नहीं कट रही है। अंचल कार्यालयों द्वारा पंजी-2 को ब्लॉक कर दिया गया है।

अप-टू-डेट रसीद नहीं होने की वजह से भवन मालिक निर्धारित पूरे कागजात नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे भवन मालिक भी आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। अंचल कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ दौड़ाया जा रहा है।


पहले भी दो बार आई, तब अफसरों ने ही फंसा दी नियमावली

बिना नक्शा के बने भवनों को नियमित करने के लिए 14 साल पहले दो बार भवन नियमितीकरण नियमावली लागू की गई थी।

वर्ष 2012 में आई नियमावली के तहत रांची में मात्र 945 आवेदन जमा हुए थे। इसमें करीब 250 भवनों का नक्शा स्वीकृत हुआ।

क्योंकि निगम के अफसरों ने नियमावली की शर्तों की व्याख्या इस तरह की कि अधिकतर लोगों को इसका फायदा नहीं मिला। लेकिन आवेदकों द्वारा जमा किए गए लाखों रुपए उन्हें वापस नहीं मिले।

इसके बाद सरकार ने नियमावली में संशोधन कर पुनः लागू किया, लेकिन मात्र 240 आवेदन ही जमा हुए।

नियमावली स्पष्ट नहीं होने से लोगों को इसका फायदा नहीं मिला। इस बार भी यदि नियमावली को स्पष्ट नहीं किया गया तो पुरानी नियमावली की तरह लोगों को फिर इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।

अब महंगा बालू मिलना भी मुश्किल:बालू की किल्लत, रांची में 100 सीएफटी बालू का दाम 4 दिन में 3 हजार से 9 हजार पर पहुंचा

अवैध स्टॉक करने वालों ने कहा- हमें ही 22 हजार का बालू 90 हजार में मिल रहा है झारखंड में बालू की किल्लत थम नहीं रही है। राज्य के कुल 444 बालू घाटों में से अब तक सिर्फ 13 घाटों की ही लीज फाइनल हो सकी है। इसका सीधा फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं। नदियों से बालू का अवैध खनन लगातार जारी है और माफिया इसका बड़े पैमाने पर स्टॉक कर रहे हैं।

हालात यह हैं कि मात्र चार दिनों के भीतर ही राजधानी रांची में बालू की कीमत तीन गुना तक बढ़ गई है। चार दिन पहले जो 100 सीएफटी (CFT) बालू 3,000 से 3,500 रुपये में मिल रहा था, उसका दाम अब 9,000 रुपये तक पहुंच गया है। अब रांची में अवैध (चोरी का) बालू भी मुश्किल से मिल पा रहा है।

‘दैनिक भास्कर’ ने सोमवार को शहर के तीन स्टॉकिस्टों की पड़ताल की। उन्होंने बताया कि वे पहले हाइवा से बालू मंगाकर स्टॉक करते थे। पहले 12 चक्के वाला एक हाइवा (1,000 सीएफटी) बालू 22 हजार रुपये में पड़ता था। ऐसी स्थिति में वे एक टर्बो (100 सीएफटी) बालू 3,000 से 3,500 रुपये में सप्लाई कर देते थे। लेकिन अब खनन विभाग और पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस द्वारा मनमाना पैसा मांगा जा रहा है, जिसके कारण अब एक हाइवा बालू मंगाने पर 90 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं।

ट्रैक्टर चालकों ने कहा- एक ट्रैक्टर बालू के लिए पुलिस को देते हैं 1,400 रुपये; बालू महंगा तो मिलेगा ही…

धनबाद में भी 100 सीएफटी बालू की कीमत 7,000 रुपये तक पहुंच गई है। यहाँ माफिया रात के अंधेरे में घाटों से बालू का उठाव करते हैं और सुबह होते ही छोटी गाड़ियों के जरिए बालू शहर में पहुंचा दिया जाता है। दैनिक भास्कर की टीम ने सोमवार को बालू लेकर गोल बिल्डिंग और पांडरपाला पहुंचे ट्रैक्टर चालकों से बालू का सौदा किया, तो उन्होंने 100 सीएफटी बालू के लिए 7,000 रुपये की मांग की। उन्होंने कहा कि घाट से लेकर शहर तक बालू लाने के लिए रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों और पेट्रोलिंग पार्टियों को पैसे देने पड़ते हैं।

दो ट्रैक्टर चालकों से भास्कर रिपोर्टर की बातचीत

बातचीत 1: शहर तक हर थाने व पेट्रोलिंग गाड़ी को पैसा देना पड़ता है…

रिपोर्टर: बालू लेना है, कैसे मिलेगा?

चालक: मिल जाएगा, टर्बो का 7,000 रुपये देना होगा।

रिपोर्टर: बालू इतना महंगा क्यों है?

चालक: पुलिस को एक ट्रैक्टर और टर्बो के लिए रोज 1,400 रुपये देने पड़ते हैं। यानी हर महीने के 42,000 रुपये।

रिपोर्टर: कहाँ-कहाँ पैसे देने होते हैं?

चालक: घाट से शहर तक के रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों और पेट्रोलिंग गाड़ियों को अलग से पैसे देने पड़ते हैं।

बातचीत 2: हिस्सा ऊपर तक जाता है, हमें भी तो कुछ बचना चाहिए…

रिपोर्टर: बालू कैसे मिलेगा?

चालक: 407 गाड़ी से आएगा, 7,000 रुपये लगेंगे।

रिपोर्टर: बालू कहाँ से लाते हो?

चालक: रात में पंडरा-बेजरा से हीरापुर आता है, हम वहाँ से छोटी गाड़ियों में लेकर आते हैं।

रिपोर्टर: इतना महंगा क्यों दे रहे हो?

चालक: हिस्सा ऊपर तक जाता है। सब देने के बाद हमको भी तो कुछ बचना चाहिए।

सिटी एसपी बोले- ऐसा है तो जांच कराएंगे: धनबाद के सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह का मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसा हो रहा है, तो इसकी पूरी जांच कराई जाएगी और जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

पुलिस की सख्ती के बाद चार दिनों में इस तरह बढ़े दाम

बालू का प्रकार और वाहनपहले की कीमत (रुपये)अब की कीमत (रुपये)
हाइवा से सामान्य बालू (1,000 सीएफटी)25,00075,000
हाइवा से प्लास्टर बालू (1,000 सीएफटी)28,00080,000
टर्बो से सामान्य बालू (100 सीएफटी)3,0009,000
टर्बो से प्लास्टर बालू (100 सीएफटी)3,50010,000
ट्रैक्टर से सामान्य बालू2,2004,500
ट्रैक्टर से प्लास्टर बालू2,6005,500 (ये भी आसानी से उपलब्ध नहीं है)

Source : https://www.bhaskar.com/g/local/jharkhand/dhanbad/news/now-it-is-difficult-to-get-expensive-sand-dbp-138030152.html