अब महंगा बालू मिलना भी मुश्किल:बालू की किल्लत, रांची में 100 सीएफटी बालू का दाम 4 दिन में 3 हजार से 9 हजार पर पहुंचा

अवैध स्टॉक करने वालों ने कहा- हमें ही 22 हजार का बालू 90 हजार में मिल रहा है झारखंड में बालू की किल्लत थम नहीं रही है। राज्य के कुल 444 बालू घाटों में से अब तक सिर्फ 13 घाटों की ही लीज फाइनल हो सकी है। इसका सीधा फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं। नदियों से बालू का अवैध खनन लगातार जारी है और माफिया इसका बड़े पैमाने पर स्टॉक कर रहे हैं।

हालात यह हैं कि मात्र चार दिनों के भीतर ही राजधानी रांची में बालू की कीमत तीन गुना तक बढ़ गई है। चार दिन पहले जो 100 सीएफटी (CFT) बालू 3,000 से 3,500 रुपये में मिल रहा था, उसका दाम अब 9,000 रुपये तक पहुंच गया है। अब रांची में अवैध (चोरी का) बालू भी मुश्किल से मिल पा रहा है।

‘दैनिक भास्कर’ ने सोमवार को शहर के तीन स्टॉकिस्टों की पड़ताल की। उन्होंने बताया कि वे पहले हाइवा से बालू मंगाकर स्टॉक करते थे। पहले 12 चक्के वाला एक हाइवा (1,000 सीएफटी) बालू 22 हजार रुपये में पड़ता था। ऐसी स्थिति में वे एक टर्बो (100 सीएफटी) बालू 3,000 से 3,500 रुपये में सप्लाई कर देते थे। लेकिन अब खनन विभाग और पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस द्वारा मनमाना पैसा मांगा जा रहा है, जिसके कारण अब एक हाइवा बालू मंगाने पर 90 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं।

ट्रैक्टर चालकों ने कहा- एक ट्रैक्टर बालू के लिए पुलिस को देते हैं 1,400 रुपये; बालू महंगा तो मिलेगा ही…

धनबाद में भी 100 सीएफटी बालू की कीमत 7,000 रुपये तक पहुंच गई है। यहाँ माफिया रात के अंधेरे में घाटों से बालू का उठाव करते हैं और सुबह होते ही छोटी गाड़ियों के जरिए बालू शहर में पहुंचा दिया जाता है। दैनिक भास्कर की टीम ने सोमवार को बालू लेकर गोल बिल्डिंग और पांडरपाला पहुंचे ट्रैक्टर चालकों से बालू का सौदा किया, तो उन्होंने 100 सीएफटी बालू के लिए 7,000 रुपये की मांग की। उन्होंने कहा कि घाट से लेकर शहर तक बालू लाने के लिए रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों और पेट्रोलिंग पार्टियों को पैसे देने पड़ते हैं।

दो ट्रैक्टर चालकों से भास्कर रिपोर्टर की बातचीत

बातचीत 1: शहर तक हर थाने व पेट्रोलिंग गाड़ी को पैसा देना पड़ता है…

रिपोर्टर: बालू लेना है, कैसे मिलेगा?

चालक: मिल जाएगा, टर्बो का 7,000 रुपये देना होगा।

रिपोर्टर: बालू इतना महंगा क्यों है?

चालक: पुलिस को एक ट्रैक्टर और टर्बो के लिए रोज 1,400 रुपये देने पड़ते हैं। यानी हर महीने के 42,000 रुपये।

रिपोर्टर: कहाँ-कहाँ पैसे देने होते हैं?

चालक: घाट से शहर तक के रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों और पेट्रोलिंग गाड़ियों को अलग से पैसे देने पड़ते हैं।

बातचीत 2: हिस्सा ऊपर तक जाता है, हमें भी तो कुछ बचना चाहिए…

रिपोर्टर: बालू कैसे मिलेगा?

चालक: 407 गाड़ी से आएगा, 7,000 रुपये लगेंगे।

रिपोर्टर: बालू कहाँ से लाते हो?

चालक: रात में पंडरा-बेजरा से हीरापुर आता है, हम वहाँ से छोटी गाड़ियों में लेकर आते हैं।

रिपोर्टर: इतना महंगा क्यों दे रहे हो?

चालक: हिस्सा ऊपर तक जाता है। सब देने के बाद हमको भी तो कुछ बचना चाहिए।

सिटी एसपी बोले- ऐसा है तो जांच कराएंगे: धनबाद के सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह का मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसा हो रहा है, तो इसकी पूरी जांच कराई जाएगी और जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

पुलिस की सख्ती के बाद चार दिनों में इस तरह बढ़े दाम

बालू का प्रकार और वाहनपहले की कीमत (रुपये)अब की कीमत (रुपये)
हाइवा से सामान्य बालू (1,000 सीएफटी)25,00075,000
हाइवा से प्लास्टर बालू (1,000 सीएफटी)28,00080,000
टर्बो से सामान्य बालू (100 सीएफटी)3,0009,000
टर्बो से प्लास्टर बालू (100 सीएफटी)3,50010,000
ट्रैक्टर से सामान्य बालू2,2004,500
ट्रैक्टर से प्लास्टर बालू2,6005,500 (ये भी आसानी से उपलब्ध नहीं है)

Source : https://www.bhaskar.com/g/local/jharkhand/dhanbad/news/now-it-is-difficult-to-get-expensive-sand-dbp-138030152.html

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